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राजस्थान: 80 वर्षीय विधवा 3 साल से नामांतरण के लिए भटक रही, शिविरों पर उठे सवाल

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राजस्थान  Published by: Shahihurehman , Date: 06/07/2026 01:39:17 pm Share:
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  • 06/07/2026 01:39:17 pm
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राजस्थान: नगरफोर्ट राज्य सरकार द्वारा आमजन को राहत देने के लिए लगाए जा रहे राजस्व एवं ग्राम सेवा शिविरों के दावों के बीच नगरफोर्ट तहसील में एक 80 वर्षीय विधवा महिला को पिछले तीन वर्षों से नामांतरण के लिए परेशान होना पड़ रहा है। कस्बा नगरफोर्ट निवासी 80 वर्षीय विधवा कमला देवी अपने दिवंगत पति की पैतृक कृषि भूमि का विरासत नामांतरण कराने के लिए पिछले तीन साल से लगातार राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगा रही हैं। पीड़िता का कहना है कि पटवारी से लेकर तहसील स्तर तक सभी आवश्यक दस्तावेज और रिपोर्ट जमा होने के बावजूद उनकी फाइल अब तक लंबित पड़ी हुई है।

जानकारी के अनुसार, उनके पति शिव शंकर शर्मा का निधन 30 जुलाई 2023 को हुआ था। ग्राम पंचायत नगरफोर्ट द्वारा 4 अगस्त 2023 को मृत्यु प्रमाण पत्र तथा 28 अगस्त 2023 को वारिसान प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिसमें विधवा कमला देवी सहित पुत्र-पुत्रियों को वैध वारिस घोषित किया गया है। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार मृतक के नाम खाता संख्या 44 व 45 में कृषि भूमि दर्ज थी, जिसमें सभी वारिसों का हिस्सा स्पष्ट रूप से निर्धारित है। परिवार का आरोप है कि सभी दस्तावेज पूरे होने के बावजूद नामांतरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है।

पीड़ित परिवार ने बताया कि उन्होंने कई बार पटवारी कार्यालय और तहसीलदार को प्रार्थना पत्र दिया। 27 मई 2025 को तहसीलदार को आवेदन क्रमांक 1192 सौंपा गया, जिसके बाद पटवार मंडल ने 5 फरवरी 2025 को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके बाद 6 फरवरी 2026 को तहसीलदार ने पुनः पटवारी को सत्यापन के आदेश दिए, जिस पर 25 फरवरी 2026 को नामांतरण की अनुशंसा भी कर दी गई। इसके अतिरिक्त परिवार द्वारा राजस्व मंडल पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन भी किया गया, जिसमें सभी वारिसों के हिस्से निर्धारित किए गए हैं। बावजूद इसके अब तक खाता संख्या 44 एवं 45 का नामांतरण लंबित है। कमला देवी ने आरोप लगाया कि बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही है और राजस्व शिविर केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से जल्द नामांतरण कराने की मांग की है, ताकि उन्हें उनके कानूनी अधिकार मिल सकें।