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उत्तर प्रदेश: काव्य संध्या का भव्य हुआ आयोजन, साहित्यकारों ने बांधा समां
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उत्तर प्रदेश: सोनभद्र कल शाम एक भव्य काव्य संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के कई वरिष्ठ साहित्यकारों और कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन वरिष्ठ साहित्यकार अनिल मिश्रा एवं एम.के. नियाज़ी द्वारा किया गया, जबकि मुख्य अतिथि एस.एस. श्रीवास्तव तथा अध्यक्षता अरविंद तिवारी ने की। कार्यक्रम में कवियों ने विभिन्न सामाजिक और मानवीय विषयों पर अपनी प्रस्तुतियां दीं। आलोक तिवारी ‘शौक’ ने जल संकट पर अपनी कविता प्रस्तुत करते हुए कहा कि “सबको पानी दे मौला, प्यासे पंछी है मौला, पानी बिन सब सून रहेगा, पानी के लिए खून बहेगा, साधु भी शैतान बनेगा, बदलेगा अपना चोला।” वहीं मकसूद खान नियाज़ी ने प्यासे परिंदों पर भावपूर्ण रचना प्रस्तुत करते हुए कहा कि “एक परिंदा आशियाना ढूंढता है, फिर वही अपना ठिकाना ढूंढता है।” इसके साथ ही उन्होंने संचालन के दौरान भी ग़ज़ल सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। हास्य कवि शरद जायसवाल ने अपनी रचना से माहौल में हास्य का रंग भरते हुए कहा कि “अभी तो हम सफ़र में हैं, सहर तक लौट आएंगे, माँ का कर्ज़ चुक जाए तुम्हारा भी चुका देंगे।” वरिष्ठ साहित्यकार अनिल मिश्रा ने ममता पर आधारित अपनी कविता में कहा कि “अस्थि रक्त मज्जा को देकर तन में ही तन निर्मित करती, ममता नेह दुलार दया को माता ही परिभाषित करती।” कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार विष्णु वाजपेई एवं पी.के. मिश्रा ने भी प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं, वहीं वरिष्ठ ग़ज़लकार चंद्र किशोर ‘चंदन’ ने अपनी ग़ज़लों से खूब वाहवाही लूटी। कार्यक्रम के अंत में अनिल मिश्रा ने सभी अतिथियों, कवियों एवं उपस्थित श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
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