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हरियाणा: रेफरमुक्त संघर्ष समिति की साइकिल यात्रा पहुंची हांसी, स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की उठाई मांग
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संक्षेप
हरियाणा: हांसी रेफरमुक्त संघर्ष समिति के संयोजक एवं फरीदाबाद निवासी सतीश चोपड़ा अपने साथियों के साथ प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति का जायजा लेने के लिए साइकिल यात्रा पर निकले हुए हैं।
विस्तार
हरियाणा: हांसी रेफरमुक्त संघर्ष समिति के संयोजक एवं फरीदाबाद निवासी सतीश चोपड़ा अपने साथियों के साथ प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति का जायजा लेने के लिए साइकिल यात्रा पर निकले हुए हैं। समिति के सदस्य अब तक हरियाणा के 12 जिलों का दौरा कर चुके हैं और विभिन्न अस्पतालों के बाहर सांकेतिक धरना देकर सरकार का ध्यान स्वास्थ्य सेवाओं की कमियों की ओर आकर्षित कर रहे हैं। इसी क्रम में रविवार को सतीश चोपड़ा और उनके साथी हांसी के सिविल अस्पताल के बाहर सांकेतिक धरने पर बैठे। उन्होंने बताया कि पूर्व में फरीदाबाद सिविल अस्पताल के बाहर 294 दिनों तक धरना दिया गया था, जिसके बाद सरकार द्वारा अस्पतालों के उन्नयन, ट्रॉमा सेंटर निर्माण, डॉक्टरों के पद बढ़ाने, नई इमारतों के निर्माण, आईसीयू एवं कैंसर उपचार जैसी कई घोषणाएं की गई थीं, लेकिन नौ माह बाद भी अधिकांश घोषणाओं पर काम शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हांसी सिविल अस्पताल में केवल प्राथमिक ट्रॉमा सुविधा उपलब्ध है, जबकि पूर्ण ट्रॉमा सेंटर का अभाव है। कैंसर डे केयर सेंटर में ऑन्कोलॉजिस्ट नहीं है तथा बच्चों के आईसीयू और एचडीयू में पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण वेंटिलेटरों का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है। गंभीर मरीजों को उच्च केंद्रों पर रेफर करना पड़ता है। सतीश चोपड़ा ने कहा कि प्रदेशभर में स्वास्थ्य कर्मियों के हजारों पद रिक्त पड़े हैं। स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, रेडियोग्राफर, लैब टेक्नीशियन और ओटी असिस्टेंट जैसे पदों पर भारी कमी के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकांश दवाइयां मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ती हैं, जबकि कई वार्डों में एयर कंडीशनर भी बंद पड़े हैं। उन्होंने सरकार से सभी रिक्त पदों को शीघ्र भरने, मेडिकल कॉलेजों को एम्स और पीजीआई की तर्ज पर विकसित करने तथा प्रत्येक जिले में ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की मांग की। उनका कहना था कि बेहतर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में आम आदमी महंगे निजी अस्पतालों का खर्च उठाने के लिए कर्ज लेने और संपत्ति बेचने तक को मजबूर हो रहा है। रेफरमुक्त संघर्ष समिति ने कहा कि उनका उद्देश्य प्रदेश के नागरिकों को उनके अपने जिले में बेहतर उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि मरीजों को बार-बार रेफर होने की समस्या से मुक्ति मिल सके।
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