Contact for Advertisement 9919916171


मध्य प्रदेश: आचार्य नित्यसेन सूरीश्वरजी का किया गया भव्य मंगल प्रवेश

- Photo by : social media

मध्य प्रदेश  Published by: Ashoke Bhandari , Date: 25/03/2026 04:56:08 pm Share:
  • मध्य प्रदेश
  • Published by: Ashoke Bhandari ,
  • Date:
  • 25/03/2026 04:56:08 pm
Share:

संक्षेप

मध्य प्रदेश: टांडा ब्रजेश बोहरा  पुण्य सम्राट श्रीमद् विजय जयंतसेन सूरीश्वरजी महाराजा के पट्टधर, वर्तमान आचार्य, सुविशाल गच्छाधिपति, हृदय सम्राट, धर्म दिवाकर श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी म सा का टांडा नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ।

विस्तार

मध्य प्रदेश: टांडा ब्रजेश बोहरा  पुण्य सम्राट श्रीमद् विजय जयंतसेन सूरीश्वरजी महाराजा के पट्टधर, वर्तमान आचार्य, सुविशाल गच्छाधिपति, हृदय सम्राट, धर्म दिवाकर श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी म सा का टांडा नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। उनके साथ  मुनिराज विद्वतरत्न विजयजी, निर्भयरत्न विजयजी एवं  साध्वीजी अविचल दृष्टा श्रीजी आदि ठाणा 10 भी पधारे। प्रातः बाग रोड स्थित दिनेश मोतीजी सिर्वी के निवास पर आगमन के साथ ही परिवार द्वारा प्रथम गहुली कर स्वागत किया गया। इसके पश्चात टांडा पुलिस थाने के सामने सुरेशजी कोठारी की दुकान से भव्य चल समारोह निकाला गया, जो जयघोष के साथ जैन मंदिर पहुँचा। मार्ग में घर-घर से श्रद्धालुओं ने अक्षत से गहुली कर गुरुदेव का अभिनंदन किया। महिलाएँ सिर पर कलश धारण कर चल रही थीं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बन गया। मंदिर पहुँचकर गुरुदेव एवं मुनि भगवंतों ने मूलनायक भगवान अजीतनाथ एवं दादा गुरुदेव के दर्शन-वंदन किए। सामूहिक गुरुवंदना दिनेशजी डांगी द्वारा कराई गई तथा स्वागत उद्बोधन श्रीसंघ अध्यक्ष पारस कुमार जैन ने दिया। धर्मसभा में मुनिराज विद्वतरत्न विजयजी ने कहा कि कर्म का प्रभाव अटल है, भगवान आदिनाथ जी को भी कर्म उदय के कारण 12 माह तक आहार नहीं मिला था। तप, त्याग, साधना और आराधना ही आत्मकल्याण का मार्ग है। उन्होंने बताया कि टांडा में 40 से अधिक श्रद्धालु वर्षीतप की कठोर आराधना कर रहे हैं, जिनमें कई युवा दंपत्ति भी शामिल हैं।


उल्लेखनीय है कि एक वर्ष पूर्व गुरुदेव की पावन निश्रा में इन तपस्वियों ने वर्षीतप आरंभ किया था। एक वर्ष में लगभग 3000 किमी विहार कर पुनः टांडा आगमन हुआ और अब तप पूर्ण होने के अवसर पर स्वयं गच्छाधिपति द्वारा विधिपूर्वक तप उचरवाया गया—जो एक अद्भुत संयोग रहा। कार्यक्रम में विधिकारक विपिनजी वागरेचा एवं संगीतकार आयुष बोहरा (नागदा) ने भक्ति का वातावरण निर्मित किया। सायंकाल तपस्वियों का भव्य बधामना एवं भक्ति कार्यक्रम आयोजित हुआ। बधामना के प्रमुख चढ़ावे घिसीबाई हीराचंद चौहान परिवार, प्रकाशचंद्र पन्नालाल लोढ़ा परिवार, सुरेश कुमार शांतिलाल कोठारी परिवार, तेजमल शोभागमल नखेत्रा परिवार, आनंदीलाल रतनलाल डूंगरवाल परिवार एवं संतोष कुमार मगनलाल भंडारी परिवार द्वारा लिए गए। कार्यक्रम में विभिन्न नगरों—मुंबई, विजयवाड़ा, कर्नाटक, नंदुरबार, मदुराई, कुक्षी, आलीराजपुर, रिंगनोद, धार आदि से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। जैन श्रीसंघ द्वारा नवकारसी एवं स्वामीवात्सल्य का आयोजन भी किया गया तथा पूरे नगर को तोरण द्वारों से सजाया गया। कार्यक्रम का संचालन पारसजी हरण ने किया एवं आभार सुरेशजी कोठारी ने व्यक्त किया।