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उत्तर प्रदेश: अन्नपूर्णा मॉडल निर्माण में अनियमितता के आरोप, 8.40 लाख की परियोजना पर उठे सवाल
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: महोबा जनपद के कबरई विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत डढहतमाफ में बन रहे अन्नपूर्णा मॉडल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: महोबा जनपद के कबरई विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत डढहतमाफ में बन रहे अन्नपूर्णा मॉडल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 8 लाख 40 हज़ार रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस मॉडल के निर्माण में घटिया सामग्री के उपयोग और मानकों की अनदेखी के आरोप सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस उद्देश्य से यह मॉडल बनाया जा रहा है, वह उद्देश्य निर्माण की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों के कारण अधूरा रह सकता है। ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू होने के कुछ ही समय बाद इसकी गुणवत्ता पर संदेह उत्पन्न होने लगा था। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। ईंट, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता कमजोर बताई जा रही है, जिससे भविष्य में यह मॉडल टिकाऊ नहीं रह पाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी जांच नहीं की गई तो सरकारी धन का दुरुपयोग साफ तौर पर सामने आ सकता है। इस पूरे मामले में जब संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, तो स्थिति और भी संदिग्ध प्रतीत हुई। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) बलराम कुमार से दूरभाष के माध्यम से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। बार-बार प्रयास के बावजूद संपर्क स्थापित नहीं हो सका। इस पर ग्रामीणों और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि जब जिम्मेदार अधिकारी ही जवाब देने से बच रहे हैं, तो पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जब से सीडीओ ने महोबा जिले का कार्यभार संभाला है, तब से विकास कार्यों में भ्रष्टाचार बढ़ा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन जिस तरह से अन्नपूर्णा मॉडल के निर्माण में अनियमितताओं की बात सामने आ रही है, उससे लोगों के संदेह को बल मिल रहा है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि उच्च स्तर पर निगरानी मजबूत होती, तो इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। ग्राम पंचायत स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कार्यदाई संस्था और ग्राम प्रधान की भूमिका इस पूरे मामले में संदिग्ध है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में पारदर्शिता का अभाव है और न ही कार्य की प्रगति की सही जानकारी सार्वजनिक की जा रही है। इससे यह आशंका और गहरा जाती है कि कहीं न कहीं मिलीभगत के चलते सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, निर्माण कार्य को मानकों के अनुरूप दोबारा कराया जाए, ताकि जनता के पैसे का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके। अन्नपूर्णा मॉडल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण और सामुदायिक सुविधाओं को बढ़ावा देना है। ऐसे में यदि इस तरह की परियोजनाओं में ही भ्रष्टाचार और लापरवाही सामने आती है, तो इससे न केवल सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है, बल्कि आम जनता का विश्वास भी कमजोर होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि विकास कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में निगरानी तंत्र कितना प्रभावी है। यदि समय-समय पर निरीक्षण और सामाजिक ऑडिट जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाए, तो इस प्रकार की अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। फिलहाल, डढहतमाफ ग्राम पंचायत में बन रहे अन्नपूर्णा मॉडल को लेकर उठे सवालों ने प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या ग्रामीणों को न्याय मिल पाता है या नहीं।
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