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उत्तर प्रदेश: विवादित जमीन को लेकर दो ग्राम प्रधान पक्षों में हुआ खूनी संघर्ष, फायरिंग में दो लोग घायल
- Photo by : social media
विस्तार
उत्तर प्रदेश: फर्रुखाबाद जिले के मोहम्मदाबाद थाना क्षेत्र में सोमवार को भूमि विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। विवादित जमीन पर निर्माण कार्य को लेकर दो ग्राम प्रधान पक्ष आमने-सामने आ गए, जिसके बाद लाठी-डंडे, लोहे की रॉड और कई राउंड फायरिंग हुई। इस हिंसक झड़प में दो लोग गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया और भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह मुड़गांव ग्राम प्रधान विवादित भूमि पर निर्माण कार्य शुरू कराने पहुंचे थे। इसी दौरान निसाई ग्राम प्रधान पक्ष के लोग भी मौके पर पहुंच गए। दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। दोनों ओर से लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला किया गया। इसी दौरान कई राउंड फायरिंग भी हुई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे। फायरिंग के दौरान निसाई ग्राम प्रधान गीता चौहान के पति सत्येंद्र सिंह और उनके पुत्र को गोली लग गई। दोनों घायलों को तत्काल के.एम. द्विवेदी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार दोनों की हालत पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। बताया जा रहा है कि इस विवाद की शुरुआत एक दिन पहले रविवार को हुई थी। मुड़गांव ग्राम प्रधान रामनारायण गाटा संख्या 818 पर खेत की जुताई करवा रहे थे, तभी निसाई ग्राम प्रधान पक्ष ने मौके पर पहुंचकर जमीन को सरकारी और ग्राम पंचायत की संपत्ति बताते हुए कार्य रुकवा दिया। इसी बात को लेकर रविवार शाम दोनों पक्षों के बीच मारपीट भी हुई थी। मामले की शिकायत मोहम्मदाबाद थाने में दी गई थी, जिसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों के तीन-तीन लोगों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की थी। इसके बावजूद विवाद शांत नहीं हुआ और सोमवार को हिंसक झड़प में बदल गया। घटना की सूचना मिलते ही मोहम्मदाबाद थाना पुलिस के साथ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और आसपास के थानों का पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। अपर पुलिस अधीक्षक ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। वहीं फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर खोखे और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। घटना के बाद ग्रामीणों में पुलिस प्रशासन के प्रति नाराजगी देखने को मिली। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि रविवार को हुई मारपीट के बाद पुलिस ने सख्त और प्रभावी कार्रवाई की होती तो सोमवार को हुई फायरिंग और खूनी संघर्ष जैसी गंभीर घटना को रोका जा सकता था। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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