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उत्तर प्रदेश: ग्रामीण खेलों को बचाने की मुहिम, कुश्ती परंपरा को नई पहचान देने में जुटे पहलवान
- Photo by : social media
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उत्तर प्रदेश: आजमगढ़ में ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से विलुप्त होती कुश्ती और पारंपरिक खेलों को पुनर्जीवित करने के लिए राष्ट्रीय पहलवान अमरजीत यादव लगातार प्रयास कर रहे हैं। भगत सिंह खेल अकादमी के माध्यम से वह अपने सहयोगियों के साथ गांव-गांव जाकर बच्चों और बालिकाओं को कुश्ती सहित अन्य खेलों से जोड़ने का अभियान चला रहे हैं।अमरजीत यादव ने कहा कि कुश्ती जैसी भारत की प्राचीन खेल विधा अब धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रही है। नाग पंचमी के अवसर पर ही दंगलों की परंपरा देखने को मिलती है, जबकि पूरे वर्ष इस खेल को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए जाते। उन्होंने बताया कि निजामाबाद, मोहम्मदपुर, ठेकमा, मेहनगर, गंधुवई और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित संसाधनों के बावजूद खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं को खेलों से दूर रखा जाता था, लेकिन अब उन्हें भी बराबरी का अवसर दिया जा रहा है। खेल न केवल बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करते हैं, बल्कि बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास और नैतिक मूल्यों का भी विकास करते हैं। अकादमी से जुड़े अरविंद यादव ने कहा कि यदि खेल विभाग और सरकार का पर्याप्त सहयोग मिले, तो गांवों से भी अंतरराष्ट्रीय और ओलंपिक स्तर के खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण प्रतिभाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं है, लेकिन सुविधाओं और संसाधनों के अभाव में उन्हें संघर्ष करना पड़ता है। अमरजीत यादव ने सरकार से मांग की कि ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को आधुनिक प्रशिक्षण, खेल सामग्री और बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकें।
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