Contact for Advertisement 9919916171


उत्तर प्रदेश: ‘बाबू राज’ के घेरे में महोबा नगर पालिका, सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर उठे सवाल

- Photo by : social media

उत्तर प्रदेश  Published by: Ranu , Date: 11/08/2026 12:29:29 pm Share:
  • उत्तर प्रदेश
  • Published by: Ranu ,
  • Date:
  • 11/08/2026 12:29:29 pm
Share:

संक्षेप

उत्तर प्रदेश: महोबा नगर पालिका परिषद महोबा की कार्यप्रणाली को लेकर इन दिनों कई सवाल उठ रहे हैं।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: महोबा नगर पालिका परिषद महोबा की कार्यप्रणाली को लेकर इन दिनों कई सवाल उठ रहे हैं। कार्यालय के निर्धारित समय के बाद कर्मचारियों की मौजूदगी, लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनाती, आम लोगों के काम में कथित देरी और सरकारी संसाधनों के निजी प्रतिष्ठान में इस्तेमाल किए जाने के आरोपों ने नगर पालिका प्रशासन की कार्यशैली को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। सबसे ज्यादा चर्चा नगर पालिका कार्यालय के देर रात तक खुले रहने को लेकर है। दावा किया जा रहा है कि एक कर्मचारी रात करीब 9:30 बजे तक कार्यालय में मौजूद रहता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि निर्धारित कार्यालय समय के बाद किस सरकारी कार्य के लिए कर्मचारी की मौजूदगी रहती है और क्या इसके लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति या लिखित आदेश जारी किया गया है।

वहीं, नगर पालिका में कुछ कर्मचारियों की लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि संबंधित कर्मचारी का वर्षों से स्थानांतरण नहीं हुआ। इसको लेकर लोगों का सवाल है कि क्या विभागीय स्थानांतरण नियमों का पालन सभी कर्मचारियों के लिए समान रूप से किया जा रहा है। पारिवारिक संबंधों के आधार पर स्थानांतरण प्रभावित होने जैसी चर्चाएं भी सामने आई हैं, हालांकि इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। नगर पालिका में अपने काम के लिए पहुंचने वाले लोगों की ओर से कथित तौर पर काम में देरी की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें कई बार अलग-अलग समय पर बुलाया जाता है या अगले दिन आने के लिए कहा जाता है। यदि ऐसी शिकायतें सही हैं तो नगर पालिका प्रशासन की जवाबदेही और कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

सरकारी गाड़ियों के निजी होटल पहुंचने का आरोप

मामले में सबसे गंभीर सवाल नगर पालिका के सरकारी वाहनों और सफाई संसाधनों के कथित इस्तेमाल को लेकर उठ रहे हैं। आरोप है कि छतरपुर रोड स्थित एक निजी होटल की साफ-सफाई और बाहरी व्यवस्था में नगर पालिका की गाड़ियों और कर्मचारियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। यदि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल वास्तव में किसी निजी प्रतिष्ठान के लिए किया गया है तो इसकी जांच आवश्यक है। यह पता लगाया जाना जरूरी है कि संबंधित वाहन किस आदेश पर वहां पहुंचे, किस कर्मचारी की ड्यूटी लगाई गई, वाहन की लॉगबुक में क्या दर्ज है और ईंधन का खर्च किस मद से किया गया।

नगर पालिका क्षेत्र के कई इलाकों में सफाई व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों की शिकायतें होने के बीच निजी प्रतिष्ठान में सरकारी सफाई संसाधनों के इस्तेमाल का आरोप और गंभीर हो जाता है। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठ रही है।

रिकॉर्ड से सामने आ सकती है पूरी तस्वीर

मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए नगर पालिका की वाहन लॉगबुक, डीजल खर्च का रिकॉर्ड, सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी रजिस्टर, कार्यालय उपस्थिति रजिस्टर, आदेश पुस्तिका और संबंधित कर्मचारियों की तैनाती एवं स्थानांतरण से जुड़े अभिलेखों की जांच की जा सकती है। इसके अलावा बाहरी जनपदों में कुछ संपत्तियों को लेकर भी चर्चाएं सामने आई हैं। हालांकि इन संपत्तियों के स्वामित्व और नगर पालिका से उनके किसी संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले दस्तावेजों की जांच जरूरी है।

अधिशासी अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल

नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ कर्मचारी अपने स्तर पर प्रभावशाली तरीके से काम कर रहे हैं और कार्यालय की व्यवस्थाओं पर अपेक्षित निगरानी नहीं हो रही है। यदि आरोप गलत हैं तो नगर पालिका प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि शिकायतों में तथ्य पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। नगर पालिका प्रशासन से लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जांच के आधार पर तथ्य सार्वजनिक किए जाएं। सरकारी वाहनों के इस्तेमाल, कर्मचारियों की तैनाती, कार्यालय में देर तक मौजूदगी और सफाई संसाधनों के उपयोग से जुड़े रिकॉर्ड की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, महोबा नगर पालिका को लेकर उठ रहे सवालों का आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों की जांच कराता है या नहीं और जांच के बाद वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।


Featured News