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मध्य प्रदेश: राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत किल्लौद में छह दिवसीय 'साथिया' प्रशिक्षण का हुआ समापन

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मध्य प्रदेश  Published by: Mahesh , Date: 10/07/2026 03:25:14 pm Share:
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  • 10/07/2026 03:25:14 pm
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मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश वॉलंटरी हेल्थ एसोसिएशन द्वारा राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) के अंतर्गत परियोजना समन्वयक जयप्रकाश पटेल के नेतृत्व में खंडवा जिले के किल्लौद ब्लॉक में पीयर एजुकेटर (साथिया) का छह दिवसीय प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्रशिक्षण का उद्देश्य समुदाय स्तर पर किशोर-किशोरियों तक स्वास्थ्य संबंधी सही एवं वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाना तथा उन्हें स्वस्थ, सुरक्षित और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। प्रशिक्षण में किशोरावस्था के दौरान होने वाले शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं सामाजिक परिवर्तनों, संतुलित पोषण, साथिया की भूमिका एवं जिम्मेदारियों, संवाद कौशल, गोपनीयता के महत्व और व्यक्तिगत मूल्यों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य, संचारी एवं गैर-संचारी बीमारियों की रोकथाम, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य, चोट एवं हिंसा, लिंग आधारित हिंसा, नशे की रोकथाम, पर्यावरण संरक्षण तथा सोशल मीडिया के सुरक्षित और सकारात्मक उपयोग जैसे विषयों पर भी विशेषज्ञों ने विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया।

प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनर आनंद दुबे ने समूह चर्चा, सहभागितापूर्ण गतिविधियों और व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को सरल एवं प्रभावी तरीके से प्रशिक्षण दिया, जिससे वे अपने-अपने क्षेत्रों में अन्य किशोर-किशोरियों तक सही जानकारी पहुंचा सकें। समापन समारोह में सभी आशा कार्यकर्ताओं एवं साथिया (पीयर एजुकेटर्स) को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के उद्देश्यों को गांव-गांव तक पहुंचाने तथा किशोरों को स्वास्थ्य, स्वच्छता और जागरूकता के प्रति प्रेरित करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में आशा सुपरवाइजर मनीषा मीणा, गोला बिवरे, मास्टर ट्रेनर आनंद दुबे, मनीषा बिल्लौरे, पूजा लौंगरे, देवीलाल मालवीया, उमंग काउंसलर संजय सिरसाटे, आशा कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में साथिया उपस्थित रहे। आयोजकों ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किशोर-किशोरियों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ेगी और वे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।