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उत्तर प्रदेश: गलाघोंटू बीमारी से बचाव के लिए पशुपालन विभाग ने शुरू किया विशेष टीकाकरण अभियान, घर-घर पहुंची टीम

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उत्तर प्रदेश  Published by: Ankit Kumar , Date: 07/07/2026 01:09:18 pm Share:
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  • 07/07/2026 01:09:18 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: गाजीपुर जिले की जमानिया तहसील क्षेत्र में पशुओं को घातक संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए पशुपालन विभाग ने विशेष टीकाकरण अभियान चलाया।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: गाजीपुर जिले की जमानिया तहसील क्षेत्र में पशुओं को घातक संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए पशुपालन विभाग ने विशेष टीकाकरण अभियान चलाया। सोमवार को रायपुर गांव में विभाग की टीम ने घर-घर पहुंचकर गाय, भैंस और बछड़ों का गलाघोंटू (हेमोरैजिक सेप्टीसीमिया) रोग से बचाव के लिए टीकाकरण किया। बदलते मौसम और वर्षा ऋतु को देखते हुए विभाग ने पशुपालकों से समय पर टीकाकरण कराने की अपील की। पशु चिकित्साधिकारी के निर्देशन में मुख्य पशुधन प्रसार अधिकारी एवं उनकी टीम ने गांव का दौरा कर पशुपालकों के घरों पर बंधे मवेशियों को टीके लगाए। इस दौरान पशुपालकों को गलाघोंटू बीमारी के प्रति जागरूक भी किया गया और इसके लक्षणों एवं बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।

टीम ने बताया कि गलाघोंटू एक अत्यंत संक्रामक एवं जानलेवा जीवाणु जनित बीमारी है, जिसका खतरा वर्षा ऋतु की शुरुआत में सबसे अधिक रहता है। इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में अचानक तेज बुखार आना, गले में सूजन होना, सांस लेने में परेशानी या घुर-घुर की आवाज आना तथा मुंह से अत्यधिक लार टपकना शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय समय पर टीकाकरण कराना है। पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से अपील की कि वे अपने सभी मवेशियों का समय पर टीकाकरण कराएं, किसी भी पशु को टीकाकरण से वंचित न रखें तथा बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करें। साथ ही बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने की भी सलाह दी गई, ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके। रायपुर गांव के ग्रामीणों और पशुपालकों ने विभाग द्वारा चलाए जा रहे डोर-टू-डोर टीकाकरण अभियान की सराहना की और टीम का सहयोग करते हुए अपने मवेशियों का टीकाकरण कराया। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तहसील क्षेत्र के अन्य गांवों में भी चरणबद्ध तरीके से शत-प्रतिशत पशुओं का टीकाकरण किया जाएगा, ताकि संभावित महामारी पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके और पशुधन को सुरक्षित बनाया जा सके।