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उत्तर प्रदेश: 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं को मिला बड़ा झटका, लाइफलाइन टैरिफ के दायरे से बाहर होने का दावा

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उत्तर प्रदेश  Published by: Rajput Ranjeet , Date: 20/07/2026 03:21:32 pm Share:
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  • 20/07/2026 03:21:32 pm
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उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) द्वारा बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं का स्वीकृत बिजली लोड बढ़ाए जाने के बाद करीब 47 लाख उपभोक्ताओं पर लाइफलाइन टैरिफ का लाभ प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इस मुद्दे को लेकर यूपी राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आपत्ति दर्ज कराते हुए राज्य विद्युत नियामक आयोग का दरवाजा खटखटाया है। जानकारी के अनुसार, अब तक जिन घरेलू उपभोक्ताओं की वार्षिक बिजली खपत 1200 यूनिट से कम थी, उन्हें लाइफलाइन टैरिफ के तहत रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जाती थी। उपभोक्ता परिषद का आरोप है कि कई उपभोक्ताओं का स्वीकृत लोड बढ़ाए जाने के कारण वे इस श्रेणी से बाहर हो गए हैं, जिससे उन्हें पहले की तुलना में अधिक बिजली बिल का भुगतान करना पड़ सकता है।

उपभोक्ता परिषद का कहना है कि लाइफलाइन टैरिफ का उद्देश्य कम बिजली खपत करने वाले गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत देना है। परिषद के अनुसार, यदि किसी उपभोक्ता की वास्तविक बिजली खपत 1200 यूनिट से कम है, तो केवल स्वीकृत लोड बढ़ जाने के आधार पर उसे रियायती टैरिफ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। परिषद ने इस व्यवस्था को उपभोक्ताओं के हितों के विपरीत बताते हुए इसकी समीक्षा की मांग की है। दूसरी ओर, इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय राज्य विद्युत नियामक आयोग के स्तर पर लिया जाना है। आयोग द्वारा मामले की सुनवाई और संबंधित पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। फिलहाल इस विषय पर UPPCL की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण या अंतिम आदेश सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में उपभोक्ता वास्तव में लाइफलाइन टैरिफ से बाहर होते हैं, तो इसका सीधा असर उनके मासिक बिजली बिल पर पड़ सकता है। ऐसे में उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि वे अपने बिजली बिल, स्वीकृत लोड और टैरिफ श्रेणी की जानकारी की जांच करें। यदि किसी प्रकार की विसंगति दिखाई दे तो संबंधित बिजली वितरण कार्यालय या उपभोक्ता सेवा केंद्र से संपर्क कर आवश्यक जानकारी प्राप्त करें। फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। उपभोक्ता परिषद और बिजली विभाग के बीच इस मुद्दे पर मतभेद के चलते लाखों उपभोक्ताओं की नजर अब राज्य विद्युत नियामक आयोग के आगामी निर्णय पर टिकी हुई है।