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उत्तर प्रदेश: पल्हारी में शुरू हुआ था पहला आवासीय बाल महोत्सव, बंदूक पर कलम की जीत का बना प्रतीक

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उत्तर प्रदेश  Published by: Indresh Kumar Pandey , Date: 20/07/2026 01:47:41 pm Share:
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उत्तर प्रदेश: सोनभद्र में समय बदलता है, लेकिन कुछ प्रयास ऐसे होते हैं जो इतिहास में अपनी अमिट पहचान छोड़ जाते हैं। सोनभद्र के सुदूर और तत्कालीन घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र नगवां ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पल्हारी (द्वितीय) में वर्ष 2003 में आयोजित किया गया बाल महोत्सव आज भी जिले के शैक्षिक इतिहास में एक प्रेरणादायक अध्याय के रूप में याद किया जाता है। 7 से 9 मार्च 2003 तक आयोजित ‘प्रथम तीन दिवसीय बाल बसंतोत्सव एवं राष्ट्रीय सद्भावना संवर्धन समारोह’ केवल एक प्रतियोगिता नहीं था, बल्कि यह उस समय के भय और चुनौतियों के बीच शिक्षा, संस्कार और सकारात्मक सोच का संदेश देने वाला बड़ा अभियान था। इस आयोजन ने यह साबित किया कि शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से समाज में बदलाव लाया जा सकता है।

उस दौर में जब नगवां क्षेत्र को नक्सल गतिविधियों के कारण बेहद संवेदनशील माना जाता था और लोग वहां जाने से भी हिचकते थे, तब शिक्षक बी.के. सिंह ‘महादेव’ यानी डॉ. बृजेश महादेव ने बच्चों की प्रतिभा को सामने लाने और उन्हें बेहतर अवसर देने का संकल्प लिया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए पूरी मेहनत की। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए डॉ. बृजेश महादेव ने अपने दो माह का वेतन तक समर्पित कर दिया। उनका उद्देश्य केवल बच्चों के बीच प्रतियोगिता कराना नहीं था, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, संस्कार, सामाजिक एकता और अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच उपलब्ध कराना था।

इस बाल महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता इसका आवासीय और सामुदायिक स्वरूप था। जिले के दो दर्जन से अधिक विद्यालयों के लगभग 500 छात्र-छात्राओं ने इसमें हिस्सा लिया। तीन दिनों तक बच्चों के रहने, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंध समिति पल्हारी और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर निभाई। यह आयोजन ग्रामीण सहभागिता और सामाजिक समरसता का अनूठा उदाहरण बना। महोत्सव के दौरान बच्चों ने बौद्धिक प्रतियोगिताओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और खेल गतिविधियों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बच्चों के उत्साह और आयोजन की सफलता को देखते हुए जिले के प्रशासनिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने भी इसमें भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन लाल जी जायसवाल और लल्लन सिंह ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधायक राबर्ट्सगंज तीरथ राज उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता सोनांचल इंटर कॉलेज घोरावल के प्रधानाचार्य के.पी. मौर्य ने की। विशिष्ट अतिथियों में तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी हीरामणि मिश्र, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अवधनारायण मौर्य, डायट प्राचार्य परमहंस यादव, खंड विकास अधिकारी प्रवीण कुमार राय और सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी उमाशंकर उपाध्याय सहित कई अधिकारी शामिल हुए। स्थानीय स्तर पर ग्राम प्रधान घरमजीत सिंह, सदस्य जोगेश्वर सिंह, ग्रामसेवक शेर श्याम सिंह और कोटेदार रामसेवक सहित ग्रामीणों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

पल्हारी में शुरू हुआ यह अभियान केवल एक वर्ष तक सीमित नहीं रहा। वर्ष 2003 से 2007 तक लगातार पांच वर्षों तक यह बाल महोत्सव आयोजित होता रहा और हर वर्ष सैकड़ों बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिला। समापन समारोहों में बच्चों के साथ-साथ क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को भी सम्मानित किया जाता था। आज वर्षों बाद भी पल्हारी का यह बाल बसंतोत्सव सोनभद्र के शैक्षिक इतिहास में एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में याद किया जाता है। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा, संस्कार और सकारात्मक प्रयास समाज को नई दिशा दे सकते हैं। डॉ. बृजेश महादेव का यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।