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बिहार: बकरा पालन से बदली किस्मत, चार युवाओं ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

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बिहार  Published by: Md Firoz Alam , Date: 04/05/2026 05:00:00 pm Share:
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  • 04/05/2026 05:00:00 pm
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विस्तार

बिहार: मनिहारी प्रखंड अंतर्गत बोलिया पंचायत से आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है। यहाँ गांव के चार नौजवान युवकों ने पारंपरिक सोच से हटकर बकरा पालन को अपना व्यवसाय बनाया और आज वे इसी के जरिए न सिर्फ अपनी आजीविका चला रहे हैं, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए एक मिसाल भी बन चुके हैं। सीमित संसाधन, पूंजी की कमी और शुरुआती अनुभव के अभाव के बावजूद इन युवकों ने सामूहिक प्रयास और आपसी सहयोग से बकरा पालन की शुरुआत की।

स्थानीय लोगों के अनुसार, इन चारों युवकों ने शुरुआत में बहुत कम संख्या में बकरों से काम आरंभ किया था। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन मेहनत, लगन और धैर्य के साथ उन्होंने अपने कार्य को आगे बढ़ाया। समय पर चारा प्रबंधन, नियमित देखभाल, टीकाकरण, साफ-सफाई और पशुओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देकर उन्होंने धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को मजबूत किया। बेहतर प्रबंधन और अनुभव के साथ बकरों की संख्या बढ़ती गई और आज बकरा पालन से उन्हें अच्छी-खासी आमदनी होने लगी है।

युवकों का कहना है कि शुरुआती दिनों में आर्थिक और तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा। बाजार की जानकारी, पशुओं की बीमारी और पूंजी की व्यवस्था उनके लिए बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इस दौरान सरकारी योजनाओं, पशुपालन विभाग की सलाह और अनुभवी लोगों के मार्गदर्शन से उन्हें काफी सहायता मिली। सरकारी जानकारी और प्रशिक्षण से उन्हें आधुनिक तरीकों की समझ हुई, जिससे उनका व्यवसाय और अधिक लाभकारी बन सका।

आज यह बकरा पालन न सिर्फ इन चारों युवकों के परिवारों के भरण-पोषण का मुख्य साधन बन गया है, बल्कि गांव के अन्य युवाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रहा है। कई युवा उनसे संपर्क कर बकरा पालन की जानकारी ले रहे हैं और इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की इच्छा जता रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि ऐसे प्रयासों से गांव में बेरोजगारी कम होगी और शहरों की ओर हो रहा पलायन भी रुकेगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने से गांव की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। बोलिया पंचायत के इन चार नौजवानों की यह पहल आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और यह साबित कर रही है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो ग्रामीण क्षेत्रों में रहकर भी आत्मनिर्भर बना जा सकता है।