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बिहार: बदहाल सड़क पर फूटा जनाक्रोश, जाम व टायर जलाकर उग्र प्रदर्शन

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बिहार  Published by: Md Firoz Alam , Date: 04/05/2026 05:03:34 pm Share:
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  • 04/05/2026 05:03:34 pm
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संक्षेप

बिहार: कटिहार जिले के इमली का चौक से गैस गोदाम तक जाने वाली कदमपुर–रोजितपुर मुख्य सड़क की बदहाल स्थिति ने सोमवार को जनता का सब्र तोड़ दिया।

विस्तार

बिहार: कटिहार जिले के इमली का चौक से गैस गोदाम तक जाने वाली कदमपुर–रोजितपुर मुख्य सड़क की बदहाल स्थिति ने सोमवार को जनता का सब्र तोड़ दिया। वार्ड संख्या 25 और वार्ड संख्या 45 के बीच स्थित इस मार्ग पर सड़क जर्जर होने और लगातार जलजमाव की गंभीर समस्या से आक्रोशित ग्रामीणों एवं आम नागरिकों ने सड़क जाम कर दिया और टायर जलाकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सड़क वर्षों से उपेक्षा का शिकार है। जगह-जगह गड्ढे, टूटी सतह और जमा पानी के कारण राहगीरों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। आए दिन दोपहिया वाहन चालक गिरकर घायल हो रहे हैं, जबकि बारिश के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। यह मार्ग क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी रास्ते से स्कूल, प्राइवेट डॉक्टर, होम्योपैथी कॉलेज, अस्पताल और अन्य आवश्यक सेवाओं तक लोग आवाजाही करते हैं। मरीजों, बुजुर्गों, महिलाओं और छात्रों को जान जोखिम में डालकर इस सड़क से गुजरना पड़ रहा है।

स्थानीय समस्या को लेकर नेतृत्वकारी मो. नियाज अधिवक्ता एवं शह समाजसेवी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक सड़क निर्माण और जलनिकासी की ठोस व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। नगर निगम के अजय कुमार जाय जूनियर इंजीनियर ने जिला प्रशासन के निर्देश पर प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और शीघ्र सड़क मरम्मत एवं जलनिकासी कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद लोगों को समझा-बुझाकर सड़क जाम हटवाया गया।

हालांकि ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर आश्वासन सिर्फ कागज़ों तक सीमित रहा, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। स्थानीय जनता अब सिर्फ वादे नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम चाहती है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस बार बदहाल सड़क की सुध लेगा, या फिर जनता को एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा?