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गुजरात: किसानों के हक की लड़ाई के लिए बनेगी नई ‘किसान पावर पार्टी’, बड़े आंदोलन का ऐलान

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गुजरात  Published by: Sojitra Ashaben , Date: 19/06/2026 11:25:53 am Share:
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  • 19/06/2026 11:25:53 am
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संक्षेप

गुजरात: गुजरात में अब एक नई पार्टी का गठन किया जाएगा, जो राज्य के 54 लाख किसान परिवारों के हक, अधिकार और न्याय के लिए संघर्ष करेगी।

विस्तार

गुजरात: गुजरात में अब एक नई पार्टी का गठन किया जाएगा, जो राज्य के 54 लाख किसान परिवारों के हक, अधिकार और न्याय के लिए संघर्ष करेगी। यह पार्टी किसानों की समस्याओं को आवाज देने तथा किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए कार्य करेगी। किसान अपनी उपज का मूल्य स्वयं निर्धारित कर सकें और अपने खेतों तथा बागानों में उत्पादित वस्तुओं को अपने स्वयं के ब्रांड नाम से बेच सकें, इसके लिए किसान पावर पार्टी प्रयास करेगी। इससे किसानों को बहुत लाभ होगा। पार्टी किसानों को उचित मूल्य पर खाद, बीज और कृषि दवाइयाँ उपलब्ध कराने के लिए कार्य करेगी। किसानों को उचित दर पर बिजली मिले, इसके लिए भी सभी आवश्यक प्रयास किए जाएंगे। किसानों को डीजल जैसी आवश्यक वस्तुओं की कमी का सामना न करना पड़े और उन्हें पर्याप्त मात्रा में डीजल उपलब्ध हो, इसके लिए भी पार्टी कार्य करेगी। सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ किसानों तक पहुंचे, इसके लिए उन्हें जागरूक और जानकारी प्रदान की जाएगी। किसानों पर होने वाली गलत दबंगई, दमन, तानाशाही और पुलिस उत्पीड़न के खिलाफ किसान हित में हर संभव कार्य किया जाएगा।


इस पार्टी के गठन से किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। अडानी, अंबानी जैसी कंपनियां यदि किसानों की अनुमति के बिना अवैध रूप से हाईटेंशन बिजली के पोल और लाइनें स्थापित करती हैं, तो उन्हें ऐसा नहीं करने दिया जाएगा। यदि किसान की अनुमति के बिना उसके खेत या बगीचे में हाईटेंशन लाइन का सर्वे किया जाएगा, तो कंपनी के अधिकारियों, ठेकेदारों, एजेंसियों और कर्मचारियों को प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। यदि जबरन किसानों की अनुमति के बिना हाईटेंशन लाइनें डाली जाती हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर किसानों की ओर से पुलिस एफआईआर से लेकर हाईकोर्ट तक लड़ाई लड़ी जाएगी। इसमें किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

 


अब किसान जागरूक हो चुके हैं। इसके लिए गुजरात के किसानों को एकजुट होने की आवश्यकता है। कानून सभी के लिए समान है—अमीर, गरीब, अधिकारी, नेता और आम जनता, सभी के लिए कानून बराबर है। यदि राज्य के किसान अपने अधिकारों और हकों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करेंगे, तो निश्चित रूप से सफलता मिलेगी। यह लोकतंत्र है। दुनिया में ऐसी कोई ताकत नहीं है जो किसानों पर अंग्रेजों से अधिक अत्याचार कर सके। यह पार्टी किसानों पर अत्याचार करने वालों को भी सबक सिखाएगी। किसानों को मार्केटिंग यार्ड में फसल बेचते समय होने वाली कटौती को स्थायी रूप से बंद कराया जाएगा। कपास, मूंगफली आदि फसलों में होने वाली कटौती समाप्त कराने के प्रयास किए जाएंगे। किसानों को पर्याप्त फसल बीमा नहीं मिलता। प्राकृतिक आपदाओं के समय किसानों को पूरा मुआवजा मिले, इसके लिए सभी प्रयास किए जाएंगे। किसानों को हर समस्या के लिए आंदोलन और संघर्ष करना पड़ता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। सरकार को पहले से ही इसकी योजना बनानी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। किसानों को उनकी भूमि के अनुसार पर्याप्त कृषि ऋण मिलना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब किसानों को मुफ्त प्लॉट दिए जाने चाहिए। किसानों को 24 घंटे बिजली मिलनी चाहिए।

 

 

वर्तमान समय में किसानों को 8 घंटे भी पर्याप्त बिजली नहीं मिलती, जबकि उद्योगों को 24 घंटे बिजली दी जाती है। गांवों का विकास बहुत कम हुआ है। कई गांवों में सड़क, नाली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। गांवों में सफाई कर्मचारियों की कमी है। स्कूलों और अस्पतालों में पर्याप्त स्टाफ नहीं है। बाजारों के किनारे वृक्षारोपण की कमी है। कई गांवों में पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था नहीं है। पुस्तकालय नहीं हैं और स्कूलों का नवीनीकरण भी नहीं होता। पशुपालकों को दूध का उचित मूल्य नहीं मिलता। कई गांवों में स्ट्रीट लाइट की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। राजनीतिक नेता केवल चुनाव के समय वोट मांगने गांवों में आते हैं, लेकिन किसानों और जनता की समस्याओं के लिए बाद में दिखाई नहीं देते। किसान आंदोलन के समय भी कई जनप्रतिनिधियों के पास किसानों से मिलने का समय नहीं होता। हाल ही में भाजपा गुजरात अध्यक्ष श्री जगदीशभाई विश्वकर्मा जब राजकोट आए थे, तब मीडिया द्वारा किसान आंदोलन के बारे में पूछे गए प्रश्न का उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया। इससे यह प्रतीत होता है कि किसानों की बात कोई सुनने को तैयार नहीं है। राजकोट के भाजपा सांसद श्री पुरुषोत्तम रुपाला ने किसानों को आश्वासन दिया था कि।