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मध्य प्रदेश: अतिक्रमण हटाओ अभियान पर सियासी घमासान, जनप्रतिनिधि आए आमने-सामने

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मध्य प्रदेश  Published by: Ashok Mahule , Date: 16/05/2026 01:29:43 pm Share:
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  • 16/05/2026 01:29:43 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: खैरलांजी नगर इन दिनों अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर जबरदस्त राजनीतिक और सामाजिक विवाद के केंद्र में आ गया है।

विस्तार

मध्य प्रदेश: खैरलांजी नगर इन दिनों अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर जबरदस्त राजनीतिक और सामाजिक विवाद के केंद्र में आ गया है। सेवा सहकारी समिति मर्यादित बैंक की भूमि पर फैले अतिक्रमण को हटाने पहुंचे राजस्व अमले की कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र की राजनीति को गर्म कर दिया है। इस पूरे मामले में जिला पंचायत सदस्य मधु ऋषि शुक्ला और जिला पंचायत सदस्य सुनीता मानसिंह बहेटवार आमने-सामने दिखाई दिए, जिसके बाद यह मुद्दा केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा का विषय बन गया। घटना उस समय चर्चा में आई जब खैरलांजी राजस्व विभाग का अमला पुलिस बल के साथ सेवा सहकारी समिति मर्यादित बैंक की जमीन पर पहुंचे अतिक्रमण को हटाने पहुंचा। प्रशासन की इस अचानक कार्रवाई से अतिक्रमणकारियों और आसपास के व्यापारियों में हड़कंप मच गया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर एकत्रित हो गए और देखते ही देखते मामला बहस और आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया। बताया जा रहा है कि सेवा सहकारी समिति मर्यादित बैंक खैरलांजी की बाउंड्रीवाल निर्माण के लिए जिला पंचायत सदस्य मधु ऋषि शुक्ला द्वारा लगभग चार लाख रुपये की राशि स्वीकृत कराई गई थी। निर्माण कार्य प्रारंभ होने से पहले बैंक परिसर की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना आवश्यक बताया गया। इसी उद्देश्य से राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी।


लेकिन जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई, जिला पंचायत सदस्य सुनीता मानसिंह बहेटवार ने इसका विरोध दर्ज कराया। उनका आरोप था कि प्रशासन गरीब और छोटे दुकानदारों को निशाना बनाकर कार्रवाई कर रहा है जबकि बड़े स्तर पर फैले अतिक्रमणों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन वास्तव में निष्पक्ष है तो पूरे क्षेत्र का सीमांकन कराकर सभी प्रकार के अतिक्रमण हटाए जाएं। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार दोनों जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस हुई। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि तहसीलदार और पुलिस अधिकारियों को बीच-बचाव करना पड़ा। प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास किया और मामले को कानून व्यवस्था से जोड़ते हुए समझाइश दी। इस विवाद के बीच सबसे बड़ा प्रश्न बैंक की वास्तविक भूमि को लेकर खड़ा हुआ। दस्तावेजों के अनुसार बैंक की भूमि लगभग 38 डिसमिल बताई जा रही है, लेकिन मौके पर राजस्व अधिकारियों को लगभग 20 डिसमिल जमीन ही दिखाई दी। इसी अंतर को लेकर विवाद और गहरा गया। जिला पंचायत सदस्य मधु ऋषि शुक्ला ने आरोप लगाया कि वर्षों से राजनीतिक संरक्षण के चलते बैंक की भूमि पर धीरे-धीरे अतिक्रमण होता गया और अब जब निर्माण कार्य प्रारंभ होने वाला है तब यह मामला सामने आया है। मधु ऋषि शुक्ला ने कहा कि यदि पहले अतिक्रमण हटाया गया होता तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि बैंक परिसर के आसपास बने कुछ पक्के निर्माण और दुकानों के कारण आम नागरिकों के आवागमन में भी परेशानी हो रही है। उनका कहना था कि बैंक की भूमि सरकारी संपत्ति है और इसे मुक्त कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।


वहीं दूसरी ओर जिला पंचायत सदस्य सुनीता मानसिंह बहेटवार ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बैंक के सामने वर्षों से गरीब परिवार छोटे-छोटे व्यवसाय चलाकर अपना जीवनयापन कर रहे हैं। ऐसे लोगों को अचानक हटाना उचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि पहले पूरे क्षेत्र का वैज्ञानिक सीमांकन कराया जाए, उसके बाद ही कार्रवाई की जाए ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो। सुनीता बहेटवार ने यह भी कहा कि यदि दस्तावेजों में 38 डिसमिल भूमि दर्ज है तो प्रशासन पहले यह स्पष्ट करे कि शेष भूमि कहां गई। केवल छोटे दुकानदारों को हटाकर समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि बड़े अतिक्रमण मौजूद हैं तो उन पर भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान स्थानीय महिलाओं और व्यापारियों ने भी अपनी बात रखी। कई महिलाओं ने कहा कि वर्षों से वे छोटी दुकानों के माध्यम से अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। यदि प्रशासन उन्हें हटाता है तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। महिलाओं ने प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था की मांग भी की। राजस्व विभाग की ओर से तहसीलदार तीरथ प्रसाद अधारिया ने बताया कि प्रारंभिक जांच में भूमि सीमांकन और दस्तावेजों में अंतर सामने आया है। उन्होंने कहा कि राजस्व अभिलेखों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि कहीं अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार उसे हटाया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन किसी के साथ पक्षपात नहीं करेगा और सभी मामलों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। तहसीलदार ने कहा कि मौके पर तत्काल सीमांकन संभव नहीं था क्योंकि पुराने नक्शों और अभिलेखों का परीक्षण आवश्यक है। उन्होंने आश्वासन दिया कि राजस्व विभाग जल्द ही विस्तृत मापन और जांच कराएगा ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
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घटना के बाद खैरलांजी नगर में राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। लोग इसे केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं बल्कि स्थानीय राजनीति की शक्ति परीक्षा के रूप में भी देख रहे हैं। दोनों जिला पंचायत सदस्यों के समर्थक अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुट गए हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर में लंबे समय से कई स्थानों पर अतिक्रमण फैला हुआ है, लेकिन कार्रवाई चुनिंदा स्थानों पर ही होती है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि यदि अभियान चलाया जाए तो पूरे नगर में समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए ताकि। 


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