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राजस्थान: शेरो-शायरी की यादगार महफिल में उर्दू अदब और शानदार कलामों का दिखा रंग

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राजस्थान  Published by: Shahihurehman , Date: 27/05/2026 04:55:13 pm Share:
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  • 27/05/2026 04:55:13 pm
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संक्षेप

राजस्थान: मुराद एकेडमी टोंक के तत्वावधान में आयोजित 19वां सालाना मुशायरा “एक शाम इब्राहीम अली जीशान के नाम” शीर्षक के साथ एक निजी मैरिज हॉल में बड़े ही अदबी और शानदार माहौल में संपन्न हुआ।

विस्तार

राजस्थान: मुराद एकेडमी टोंक के तत्वावधान में आयोजित 19वां सालाना मुशायरा “एक शाम इब्राहीम अली जीशान के नाम” शीर्षक के साथ एक निजी मैरिज हॉल में बड़े ही अदबी और शानदार माहौल में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में देश के विभिन्न शहरों से आए शायरों ने अपने कलाम पेश कर श्रोताओं को देर रात तक मंत्रमुग्ध किए रखा। मुशायरे में साहित्य प्रेमियों और उर्दू अदब से जुड़े लोगों की भारी भीड़ मौजूद रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुराद एकेडमी के संरक्षक अब्दुल हफीज शौक अहसनी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में जिला राइफल शूटिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष फैसल सईदी तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में राजस्थान उर्दू अकादमी जयपुर के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर हुसैन रजा खान उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ कारी हाफिज जाकिर द्वारा तिलावते कुरान से किया गया, जबकि कारी हारिस वासिफी ने नआते पाक पेश कर माहौल को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।

मुशायरे की शुरुआत में प्रोफेसर हुसैन रजा खान ने दिवंगत मौलाना जमील, साहिबजादा अनवर अली खान तथा हाफिज मंजूर अहमद खान को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद एकेडमी की ओर से दिवंगत हस्तियों के परिजनों का माला और शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया गया। वहीं मशहूर शायर इब्राहीम अली जीशान को भी साफा, माला और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। मुशायरे में कई नामचीन शायरों ने अपने बेहतरीन अशआर पेश किए। इब्राहीम अली जीशान ने अपने अंदाज में शायरी पढ़ते हुए कहा, “शब ए फिराक ना जाने कहां थे खोए हुए, ना पूरे जागे हुए थे ना पूरे सोए हुए।” वहीं रेहान फारूकी ने इश्क और जज्बात पर आधारित कलाम सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। खलीक शाइक, एजाज फाईजी, सिराज टोंकी, नवाब वासिफी, शौक अहसनी और अन्य शायरों ने भी अपने कलाम से महफिल को यादगार बना दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन कारी मुतीउल्लाह नवाब वासिफी ने किया। मुशायरा देर रात लगभग एक बजे तक चलता रहा और श्रोता अंत तक पूरी रुचि के साथ कार्यक्रम का आनंद लेते रहे। अंत में अध्यक्ष अब्दुल हफीज शौक अहसनी ने सभी अतिथियों, शायरों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता और शहर के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।