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हरियाणा: विकलांग मंच ने मनरेगा बहाली की मांग को लेकर दिया धरना 

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हरियाणा  Published by: Anil , Date: 26/02/2026 02:00:45 pm Share:
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  • 26/02/2026 02:00:45 pm
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संक्षेप

हरियाणा: हिसार विकलांग अधिकार मंच हरियाणा की हिसार जिला कमेटी के बैनर तले हिसार के उपायुक्त कार्यालय पर मनरेगा कानून को लेकर धरना-प्रदर्शन कर जिला उपायुक्त को ज्ञापन सोंपा गया।

विस्तार

हरियाणा: हिसार विकलांग अधिकार मंच हरियाणा की हिसार जिला कमेटी के बैनर तले हिसार के उपायुक्त कार्यालय पर मनरेगा कानून को लेकर धरना-प्रदर्शन कर जिला उपायुक्त को ज्ञापन सोंपा गया। धरने की अध्यक्षता जिला प्रधान कृष्ण गुरी ने की और संचालन संदीप हिसार ने किया। विकलांगों को संबोधित करने के लिए ऋषिकेश राजली महासचिव विकलांग अधिकार मंच हरियाणा धरने पर पहुंचे। विकलांग अधिकार मंच हरियाणा की जिला कमेटी ने उपायुक्त की मार्फत मुख्यमंत्री के नाम पत्र जारी कर हरियाणा सरकार को अवगत करवाया कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की जगह वीबी ग्राम जी कानून लेकर आई है, जोकि गरीब जनता व विकलांगों के लिए हितकारी नहीं है, इसमें अधिकार सुरक्षित नहीं है इसलिए इसे रद्द करके मनरेगा को बहाल किया जाए। प्रेस बयान में ऋषिकेश राजली ने बताया कि वीबी ग्राम जी में विकलांग लोगों के लिए - जो बहुत ज्यादा बेरोजगारी, जमीन की कमी और गरीबी का सामना करते हैं - मनरेगा में ग्रामीण भारत में मजदूरी वाली नौकरी के बहुत कम तरीकों में से एक रहा है। हालांकि, लगातार कम पैसे मिलने, काम न मिलने, डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम और काम की जगहों पर ठीक से रहने की जगह न होने की वजह से पिछले कुछ सालों में इस सीमित हिस्सेदारी में भी कमी आई है। इसलिए मनरेगा को रद्द करने से सीधे तौर पर ग्रामीण विकलांग मजदूरों की रोजी-रोटी का और नुकसान होगा, जिससे वे और ज्यादा गरीबी में चले जाएंगे और डिसेबिलिटी पेंशन पर निर्भर हो जाएंगे जो बहुत ही कम हैं।

 

यह दावा कि वीबी ग्राम जी में 125 दिन काम देगा, पूरी तरह से गुमराह करने वाला है, मौजूदा डिमांड पर आधारित मनरेगा के तहत भी, जान-बूझकर पैसे की कमी की वजह से औसत रोजगार 50 दिनों से कम रहा है। मनरेगा, अपनी सीमाओं के बावजूद, विकलांग लोगों को कानूनी तौर पर मजदूर मानता है, जिन्हें रोजगार, काबिलियत के हिसाब से काम और रोजी-रोटी की सुरक्षा का हक है। वीबी ग्राम जी इस अधिकार को कमजोर करता है, बाहर रखने को सही ठहराता है और विकलांग ग्रामीण मजदूरों की रोजी-रोटी, इज्जत और जिंदा रहने के लिए खतरा है। यह विकलांग लोगों के अधिकार एक्ट, 2016 का भी उल्लंघन करता है, जो भेदभाव न करने, सही सुविधा और रोजी-रोटी की सुरक्षा को जरूरी बनाता है। आज के धरने को ऋषिकेश राजली, कृष्ण गुरी, मीनू सिंगला, राजेश सलेमगढ़, संदीप मॉडल टाऊन, नसीब राजली, बलराज, देवेंद्र लोरा आदि ने संबोधित किया।