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उत्तर प्रदेश: BSP विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर आयकर विभाग की ताबड़तोड़ छापेमारी
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: रसड़ा से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के कद्दावर विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर बुधवार सुबह आयकर विभाग ने ताबड़तोड़ छापेमारी कर सियासी हलकों में हलचल मचा दी।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: रसड़ा से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के कद्दावर विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर बुधवार सुबह आयकर विभाग ने ताबड़तोड़ छापेमारी कर सियासी हलकों में हलचल मचा दी। कार्रवाई के दौरान विभाग की टीमें विधायक के पैतृक आवास, कंपनी प्लांट और होटल में दस्तावेजों की गहन जांच में जुटीं रहीं। तीन गाड़ियों में पहुंची टीम, मोबाइल फोन किए जब्त। सूत्रों के अनुसार, सुबह करीब 10 बजे आयकर विभाग की टीम तीन वाहनों से विधायक के खनवर स्थित पैतृक आवास पर पहुंची। अधिकारियों ने पहुंचते ही परिसर को अपने नियंत्रण में ले लिया और घर में मौजूद सदस्यों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए। छापेमारी के दौरान विधायक के भाई रमेश सिंह भी मौके पर मौजूद थे। वह छात्रशक्ति इंफ्रा कंस्ट्रक्शन कंपनी के डायरेक्टर बताए जाते हैं। आयकर अधिकारियों ने गांव के पास स्थित कंपनी के प्लांट को सील कर वहां रखे दस्तावेजों और वित्तीय अभिलेखों की जांच शुरू की। इसके साथ ही बलिया जनपद के रसड़ा कस्बे में स्थित विधायक के आलीशान होटल ‘स्काई’ में भी छानबीन की खबर सामने आई है। विभाग की कार्रवाई देर शाम तक जारी रही। हालांकि, आयकर विभाग की ओर से आधिकारिक बयान अभी तक जारी नहीं किया गया है। छापेमारी की खबर सामने आते ही दिनेश प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भावुक और कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कार्रवाई को “असंवेदनशील” बताते हुए जांच एजेंसियों की टाइमिंग और व्यवहार पर सवाल उठाए। मंत्री ने अपने पोस्ट में लिखा कि उमाशंकर सिंह पिछले दो वर्षों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार, विधायक के अधिकांश व्यवसाय बंद हैं और वह लंबे समय से सार्वजनिक जीवन से दूर रहकर उपचार करा रहे हैं। मंत्री ने यह भी दावा किया कि विधायक स्वास्थ्य कारणों से विधानसभा सत्र में शामिल नहीं हो सके थे। दिनेश प्रताप सिंह ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में यदि विधायक की तबीयत पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तो संबंधित संस्थाएं इसकी जिम्मेदार होंगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि गंभीर अपराधों में भी न्यायालय मानवीय दृष्टिकोण अपनाता है, ऐसे में बीमारी की स्थिति में इस प्रकार की कार्रवाई उचित नहीं प्रतीत होती। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। एक ओर भाजपा नेतृत्व भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर जोर देता रहा है, वहीं दूसरी ओर उसी सरकार के मंत्री द्वारा केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना कई संकेत दे रहा है। गौरतलब है कि उमाशंकर सिंह और दिनेश प्रताप सिंह के बीच पारिवारिक संबंध भी हैं — मंत्री की पुत्री का विवाह विधायक के परिवार में हुआ है। ऐसे में मंत्री की प्रतिक्रिया को राजनीतिक के साथ-साथ व्यक्तिगत संदर्भ में भी देखा जा रहा है। आयकर विभाग की टीम दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल में जुटी है। आधिकारिक बयान आने के बाद ही कार्रवाई के कारणों और संभावित निष्कर्षों पर स्पष्टता हो सकेगी। फिलहाल, रसड़ा और बलिया की राजनीति में इस छापेमारी ने नई हलचल पैदा कर दी है, और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
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