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राजस्थान: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर गंभीर आरोप, लेखिका के दावों से बढ़ा विवाद
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संक्षेप
राजस्थान: आज कल यूपी की हर गली-चौराहे पर एक नाम जोरों-शोरों से चर्चाओं में बना हुआ है।
विस्तार
राजस्थान: आज कल यूपी की हर गली-चौराहे पर एक नाम जोरों-शोरों से चर्चाओं में बना हुआ है। वो कोई और नहीं बल्कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती हैं. उनकी यौन शोषण और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज होने के बाद मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं, जहां पहले दो नाबालिग बच्चों ने खुद पर हुए अत्याचार का खुलासा किया था। वहीं अब लेखिका भूमिका द्विवेदी लगातार उनपर गंभीर आरोप लगा रही हैं। वो उनके वाराणसी मठ में साल 2022 में दो महीने रही थीं। तभी उन्होंने कुछ ऐसा देखा, जिसे बताकर उन्होंने सबको हैरान कर दिया। उनका दावा है कि मठ के अंदर गुप्त कमरे बने हुए हैं, जहां सिर्फ स्वामी जी की सखी का कंट्रोल है, बस उन्हीं को जाने की इजाजत है और किसी को नहीं। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी दावा किया कि यहां लग्जरी माहौल, स्विमिंग पूल और गुप्त व रहस्यमयी कमरे हैं। लेखिका भूमिका द्विवेदी ने बताया कि वह साल 2022 में वाराणसी के विद्या मठ में करीब 2 महीने रुकी थीं। उनका मकसद काशी और प्रयाग पर शोध करके लिखना था, जिसके लिए स्वरूपानंद सरस्वती ने उन्हें प्रोत्साहित किया था, लेकिन उन्होंने मठ के अंदर जो कुछ देखा, उसने उनकी राय ही बदल दी थी। मठ में किसी आध्यात्मिक केंद्र जैसी सादगी के बजाय लग्जरी अधिक है। वहां एसी, एलईडी टीवी और महंगे कालीनों से सजा हुआ लग्जरी माहौल है. मठ के अंदर के हॉल इतने शानदार हैं कि आंखें चौंधिया जाएं। उन्होंने दावा किया कि मठ का पूरा नियंत्रण सखी के पास है। उन्होंने दावा किया कि वहां उन्हें एक महिला मिली। उसने खुद दावा किया कि वो स्वामी जी की 'सखी' है. वो वहां सर्वेसर्वा की तरह रहती है। मठ के भीतर कुछ ऐसे हिस्से और कमरे ऐसे हैं, जहां किसी को जाने की अनुमति नहीं है। इन्हें 'दीदी लोगों का क्षेत्र' कहा जाता है। वहां लिफ्ट से जाने का रास्ता है और आम लोगों की एंट्री पूरी तरह बैन है। इतना ही नहीं, मठ में कमरों के अलावा एक गुप्त भी दरवाजा है। इस पर सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी जाती है. इस सुरक्षा तंत्र का पूरा एक्सेस सखी के पास ही रहता है। उन्होंने मठ परिसर में स्वीमिंग पूल होने का भी दावा किया, लेकिन कहा कि मठ में रहने वाले बच्चे या छोटे बटुक वहां नहीं नहाते हैं। गरीब घरों से संबंध रखने वाले छोटे बटुकों से मठ में बहुत काम कराया जाता है। मैनेजर और रसोइया उनके सामान तक चोरी तक कर लेते हैं। 8 साल के एक सुंदर बटुक ने उनके साथ फोटो खिंचवाने से मना कर दिया था। उसने कहा था कि 'स्वामी श्री' ने आदेश दिया है कि किसी बाहरी के साथ फोटो मत खिंचवाना। उन्होंने कहा कि मठों में आमतौर पर सुबह 4 बजे उठने की परंपरा होती है। मगर, शंकराचार्य के मठ में लोग अपनी मर्जी से उठते हैं और उन्हें कोई सख्त धार्मिक दिनचर्या नहीं दिखी। यहां तक कि मठ के मैनेजर मिश्रा ने उनसे कथित तौर पर कहा था कि हर पुरुष की अपनी जरूरत होती है, वह विश्राम के लिए यहां आते हैं। मैनेजर ने भी उस महिला को स्वामी जी की सखी बताया था। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, भूमिका ने दावा किया कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के कमरे में कोई भी जा सकता था, वहां सिर्फ किताबें और ग्रंथ मिलते थे, लेकिन यहां (अविमुक्तेश्वरानंद के समय) सब कुछ छुपा हुआ और रहस्यमयी है. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने स्वरूपानंद से मिलने की कोशिश की थी, तब जानकारी मिली कि वह बीमार हैं और बंगलूरू में इलाज चल रहा है। इसके अलावा, जब उन्होंने स्वामी स्वरूपानंद से मिलने की कोशिश की, तब पता चला कि वहां अविमुक्तेश्वरानंद का कड़ा पहरा है। लेखिका ने आरोप लगाया कि जब स्वरूपानंद सरस्वती बीमार थे, तब अविमुक्तेश्वरानंद ने उनके करीबी शिष्यों (जैसे सहजानंद) तक को उनसे मिलने नहीं दिया। उनका कहना था कि जब गद्दी वाले नहीं मिल पाए तो मैं तो बहुत दूर हूं। उनका कहना है कि वह किसी दबाव में नहीं हैं और जो कुछ उन्होंने अपनी आंखों से देखा, वही बता रही हैं। उन्होंने सखी के साथ कई तस्वीरें होने का भी दावा किया। भूमिका के दावों में कितनी सच्चाई है, ये तो जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
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