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गुजरात: हाईटेंशन लाइन मुद्दे पर किसानों का आंदोलन तेज, न्याय और मुआवजे की उठी मांग
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संक्षेप
गुजरात: हाईटेंशन बिजली पोल और विद्युत लाइन के मुद्दे पर अंबानी/अडाणी कंपनी के सामने गुजरात के किसान किसी भी कीमत पर झुकेंगे नहीं।
विस्तार
गुजरात: हाईटेंशन बिजली पोल और विद्युत लाइन के मुद्दे पर अंबानी/अडाणी कंपनी के सामने गुजरात के किसान किसी भी कीमत पर झुकेंगे नहीं। ऐसा धरतीपुत्र अन्नदाता किसान नेता एवं न्याय एवं अधिकार समिति के प्रदेश अध्यक्ष श्री परसोतमभाई एन. मुंगरा (पटेल) ने स्पष्ट शब्दों में कहा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कंपनी तथा गुजरात सरकार जब तक शीघ्र समाधान नहीं लाती, तब तक किसान गांधीवादी मार्ग पर अपनी लड़ाई तथा उपवास आंदोलन जारी रखेंगे। गुजरात के किसानों की मांगें पूरी नहीं होने तक वे अपने हक और अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह किसानों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब तक बिजली कंपनी के मालिक और गुजरात सरकार किसानों को न्याय दिलाने के लिए आगे नहीं आए हैं। गुजरात सरकार, कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री को किसानों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं पर चर्चा करनी चाहिए तथा उन्हें जल्द से जल्द न्याय और उचित मुआवजा देना चाहिए।
किसानों की मांग है कि हाईटेंशन लाइन के प्रत्येक बिजली पोल के बदले 2 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए तथा प्रत्येक पोल के लिए 50 हजार रुपये प्रतिमाह किराया दिया जाए। जिन किसानों की जमीन से बिजली लाइन गुजरती है, उन्हें मुआवजा और किराया दिया जाना चाहिए। खेतों में खड़ी फसल को बिजली कंपनी द्वारा होने वाले नुकसान का अलग से मुआवजा दिया जाना चाहिए। यदि कोई दुर्घटना होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली कंपनी की होनी चाहिए। इस संबंध में बीमा कवच उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी कंपनी की होगी। किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए। यदि बिजली पोल टूटे, तार टूटे अथवा किसी कारण से मानव या पशुओं की मृत्यु हो, तो उसका पूरा मुआवजा कंपनी दे। शॉर्ट सर्किट या तार टूटने से आग लगने तथा मकान या अन्य संपत्ति को नुकसान होने पर भी कंपनी पूरी तरह जिम्मेदार होगी।
जिन किसानों की जमीन से बिजली लाइन गुजरती है, उन्हें बीमा सुरक्षा और नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। इस संबंध में कंपनी को किसानों के साथ लिखित समझौता करना चाहिए। किसानों की लिखित अनुमति के बिना बिजली लाइन नहीं डाली जानी चाहिए। यदि बिना अनुमति के लाइन डाली जाती है, तो किसानों को हाईकोर्ट से स्थगन आदेश (स्टे) लेकर न्याय की मांग करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बिजली लाइन के मुद्दे पर गुजरात पुलिस को किसानों पर लाठीचार्ज या किसी प्रकार का दमन नहीं करना चाहिए। किसान अन्नदाता हैं। हमारे घरों तक जो अनाज पहुंचता है, वह किसानों की कड़ी मेहनत और पसीने का परिणाम है। अनाज किसी फैक्ट्री में पैदा नहीं होता, यह बात सभी को याद रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसान नाराज होकर खेती करना बंद कर दें, तो समाज के लिए जीवन कठिन हो जाएगा। जिस प्रकार जवान सीमा पर देश की रक्षा करता है, उसी प्रकार किसान अपने खेतों में संघर्ष करता है। आज दोनों ही परेशान हैं, जबकि दोनों देश और जनता की सेवा करते हैं। इन दोनों को सम्मान मिलना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक किसी भी सरकार या राजनीतिक दल ने किसानों को उचित सम्मान नहीं दिया है। किसानों ने केवल पीड़ा और दमन सहा है, फिर भी उन्होंने कभी शिकायत नहीं की। वर्तमान में वर्षा और बुवाई का समय होने के बावजूद किसानों को अपनी जमीन बचाने और न्याय की मांग के लिए उपवास आंदोलन करना पड़ रहा है। मोरबी जिले के जेतपर गांव में किसान उपवास पर बैठे हुए हैं, लेकिन अब तक सरकार के मंत्री, विधायक, सांसद अथवा मुख्यमंत्री ने उनकी मुलाकात नहीं की है। सुरेंद्रनगर जिले के कोंढ गांव में भी किसान इस मुद्दे पर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार और कंपनी द्वारा अब तक उचित न्याय नहीं दिया गया है। इस मामले में शीघ्र न्याय दिलाने की मांग करते हुए न्याय एवं अधिकार समिति के प्रदेश अध्यक्ष श्री परसोतमभाई एन. मुंगरा ने सरकार से सकारात्मक पहल की आशा व्यक्त की है।
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