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मध्य प्रदेश: नगर निगम की चयनात्मक कार्रवाई से नागरिक हुए परेशान
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: शहर रतलाम में आज एक गंभीर प्रश्न हर उस नागरिक के मन में उठ रहा है, जिसने अपने जीवन की पूंजी लगाकर एक छोटा सा भूखंड खरीदा है।
विस्तार
मध्य प्रदेश: शहर रतलाम में आज एक गंभीर प्रश्न हर उस नागरिक के मन में उठ रहा है, जिसने अपने जीवन की पूंजी लगाकर एक छोटा सा भूखंड खरीदा है। “क्या अपने ही प्लॉट पर घर बनाना भी अब प्रशासन की कृपा पर निर्भर हो गया है?”नगर निगम रतलाम की कार्यप्रणाली पर यदि निष्पक्ष दृष्टि डाली जाए, तो एक चिंताजनक सच्चाई सामने आती है—नियम एक हैं, लेकिन उनका पालन अलग-अलग तरीके से किया जा रहा है। यही स्थिति आज अव्यवस्था, भेदभाव और भ्रष्टाचार की जड़ बन चुकी है। शहर में ऐसे सैकड़ों भवन खड़े हैं, जिनमें सेटबैक, नक्शा, पार्किंग और अन्य नियमों का खुला उल्लंघन हुआ है। न तो उन पर समय पर कार्यवाही की गई, न ही संबंधित अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई। वर्षों तक यह सब चलता रहा और प्रशासन मौन दर्शक बना रहा। लेकिन जैसे ही कोई नया नागरिक भवन निर्माण की अनुमति लेने जाता है, उसी प्रशासन द्वारा नियमों की पूरी किताब उसके सामने खोल दी जाती है। छोटी-छोटी आपत्तियों के नाम पर उसकी फाइल महीनों और वर्षों तक अटका दी जाती है। यह प्रश्न स्वाभाविक है, जब पुराने उल्लंघनों पर आंखें मूंदी गईं, तो नए आवेदकों पर इतनी सख्ती क्यों? क्या यह केवल नियमों का पालन है, या फिर चयनात्मक (Selective) कार्यवाही? यदि नगर निगम स्वयं अपने बनाए नियमों का पालन वर्षों तक नहीं करा पाया, तो आज उन्हीं नियमों को चुनिंदा लोगों पर थोपना न तो नैतिक है और न ही वैधानिक।
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