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मध्य प्रदेश: शरद पूर्णिमा पर मंदिरों में बंटेगा खीर का प्रसाद, पंडित शंभू दयाल शास्त्री ने बताया पर्व का धार्मिक महत्व
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: पोरसा शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर पोरसा के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं को खीर का प्रसाद वितरित किया जाएगा। इस पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।
विस्तार
मध्य प्रदेश: पोरसा शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर पोरसा के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं को खीर का प्रसाद वितरित किया जाएगा। इस पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। गांधीनगर स्थित आश्रम में पंडित शंभू दयाल शास्त्री ने शरद पूर्णिमा की धार्मिक मान्यताओं, पूजा-पद्धति और खीर के प्रसाद से जुड़ी परंपराओं के बारे में जानकारी दी। पंडित शंभू दयाल शास्त्री ने बताया कि हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों को अमृततुल्य माना जाता है। इसी आस्था के चलते लोग खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की रोशनी में रखते हैं। इसके बाद भगवान को भोग लगाकर श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया जाता है। चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की परंपरा शास्त्री ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर श्रद्धालु चंद्रमा के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि, शांति एवं अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। परंपरागत मान्यता के अनुसार, इस रात चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर को अमृतमयी माना जाता है। श्रद्धालु इसे आस्था के साथ ग्रहण करते हैं और इसे कल्याण का प्रतीक मानते हैं। उन्होंने कहा कि इस पर्व का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं का पालन करने के साथ परिवार और समाज में सकारात्मकता तथा आपसी सद्भाव को बढ़ावा देना भी है। हालांकि, खीर के सेवन से असाध्य रोगों के ठीक होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को चिकित्सकीय सलाह और उपचार जारी रखना चाहिए। शहर के विभिन्न मंदिरों में होगा प्रसाद वितरण शरद पूर्णिमा के अवसर पर भगवान गोवर्धन गिरिराज जी महाराज मंदिर, नागाजी मंदिर, राम-जानकी मंदिर छोटी जग्गा, राधा-कृष्ण मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, बंसी वाला मंदिर, श्री गणेश मंदिर, बालाजी मंदिर पुराना थाना, गल्ला मंडी मंदिर और गांधीनगर स्थित श्रीराम मंदिर सहित अन्य मंदिरों में खीर का प्रसाद वितरित किए जाने की तैयारी है। इस अवसर पर श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर भगवान को भोग लगाएंगे और प्रसाद ग्रहण करेंगे। पंडित शंभू दयाल शास्त्री ने श्रद्धालुओं से शरद पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाने की अपील की। पर्व के माध्यम से धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का संदेश दिया जाएगा।