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राजस्थान: एनजीटी आदेशों की पालना की मांग को लेकर महापड़ाव जारी, ग्रामीणों ने प्रशासन पर साधा निशाना

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राजस्थान  Published by: Pramod Kumar Bansal , Date: 30/06/2026 11:33:05 am Share:
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  • 30/06/2026 11:33:05 am
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संक्षेप

राजस्थान: कोटपूतली राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट के खिलाफ दिये गये आदेशों की पालना की मांग को लेकर जोधपुरा संघर्ष समिति का जिला कलक्टर कार्यालय के बाहर चल रहा महापड़ाव सोमवार को लगातार 05 वें दिन भी बदस्तुर जारी रहा।

विस्तार

राजस्थान: कोटपूतली राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट के खिलाफ दिये गये आदेशों की पालना की मांग को लेकर जोधपुरा संघर्ष समिति का जिला कलक्टर कार्यालय के बाहर चल रहा महापड़ाव सोमवार को लगातार 05 वें दिन भी बदस्तुर जारी रहा। संघर्ष समिति का कहना है कि एनजीटी ने अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट के संबंध में अपने आदेशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए जिला कलक्टर को 03 माह का समय दिया था, लेकिन लगभग 08 माह बीत जाने के बाद भी आदेशों का प्रभावी अनुपालन नहीं हुआ है, इसी के विरोध में ग्रामीण 25 जून से महापड़ाव पर बैठे हैं, लेकिन प्रशासन का कोई भी अधिकारी धरनास्थल पर उनकी सुध लेने नहीं पहुँचा। सोमवार को महापड़ाव को समर्थन देने पहुंचे पूर्व संसदीय सचिव रामस्वरूप कसाना ने कहा कि प्रशासन का यह रवैया बेहद संवेदनहीन और अलोकतांत्रिक है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) जैसी देश की शीर्ष पर्यावरण अदालत के आदेशों की अवहेलना सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण के साथ खिलवाड़ है। कोर्ट ने जिला कलेक्टर को 03 महीने के भीतर कार्यवाही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था, लेकिन 08 महीने बीत जाने के बाद भी फाईलें दबाकर बैठना स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कसाना ने कहा कि ग्रामीण पिछले 05 दिनों से कड़कड़ाती धूप और विपरीत मौसम में अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों का धरनास्थल पर ना आना उनकी तानाशाही को दर्शाता है। अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट के प्रदूषण से क्षेत्र का भूजल स्तर गिर रहा है और हवा जहरीली हो रही है।

 

यदि प्रशासन ने अगले 24 घंटों के भीतर संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों से वार्ता कर एनजीटी के आदेशों को जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया तो यह आंदोलन केवल कलेक्ट्रेट तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में उग्र जन-आंदोलन खड़ा किया जायेगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। समिति पदाधिकारियों ने भी सभा को संबोधित किया और मांगें पूरी होने तक धरना समाप्त ना करने का संकल्प दोहराया। सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शुक्लावास ने बताया कि इससे पहले डॉ. अंबेडकर विचार मंच एवं मेघवाल संघर्ष समिति भी लिखित रूप से आंदोलन को समर्थन दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र से लगातार बड़ी संख्या में लोग महापड़ाव में पहुँचकर अपना समर्थन दे रहे हैं। सोमवार को बिमला देवी, कलावती यादव, मेवा देवी, नांनची देवी व विमला सैन आदि महिलायें क्रमिक अनशन पर रही। संघर्ष समिति के अध्यक्ष सत्यम सुरेलिया ने कहा कि प्रशासन चाहे जितनी परीक्षा ले, हम अपनी न्यायोचित मांगों की सुनवाई और एनजीटी के आदेशों की पालना होने तक महापड़ाव से नहीं हटेंगे। इस दौरान मुकेष गुरूजी, इन्द्राज कसाना, कैलाश यादव, प्रभूदयाल गुरुजी, रामनिवास आर्य, निहाल सिंह यादव, रामावतार सुरेलिया, रामू यादव, दिनेश यादव, सतवीर यादव, रामस्वरूप सैन, रोहिताश आर्य, रामसिंह योगी, भूपसिंह धानका समेत ग्रामीण महिलायें मौजूद रही।

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