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गुजरात: मसाला उद्योग को नई रफ्तार में असम के अजारा के लिए तीसरी पार्सल स्पेशल ट्रेन रवाना

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गुजरात  Published by: Rajput Ranjeet , Date: 16/06/2026 10:43:20 am Share:
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  • 16/06/2026 10:43:20 am
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संक्षेप

गुजरात: ऊंझा एशिया के सबसे बड़े मसाला बाजार के रूप में पहचान रखने वाले ऊंझा ने एक बार फिर व्यापारिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

विस्तार

गुजरात: ऊंझा एशिया के सबसे बड़े मसाला बाजार के रूप में पहचान रखने वाले ऊंझा ने एक बार फिर व्यापारिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारतीय रेलवे की पहल और स्थानीय व्यापारियों के सहयोग से मसालों से भरी तीसरी पार्सल स्पेशल ट्रेन (थर्ड पार्सल रेक) ऊंझा रेलवे स्टेशन से असम के अजारा (AZARA) के लिए रवाना की गई। इस उपलब्धि को ऊंझा के मसाला उद्योग के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।रेलवे अधिकारियों और व्यापारिक संगठनों के अनुसार, इस विशेष पार्सल सेवा के माध्यम से ऊंझा के प्रसिद्ध मसाले अब पूर्वोत्तर भारत के बाजारों तक अधिक तेज़ी, सुरक्षा और कम लागत में पहुंच सकेंगे। इससे व्यापारियों को जहां परिवहन में सुविधा मिलेगी, वहीं किसानों को भी उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त होने की उम्मीद है।

अब तक मसालों का परिवहन मुख्य रूप से सड़क मार्ग से किया जाता था, जिसमें अधिक समय लगने के साथ-साथ परिवहन लागत भी ज्यादा आती थी। कई बार लंबी दूरी के कारण माल की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका भी बनी रहती थी। रेलवे की पार्सल स्पेशल सेवा ने इन चुनौतियों को काफी हद तक कम कर दिया है। इससे समय की बचत होने के साथ-साथ माल की सुरक्षित और समयबद्ध डिलीवरी सुनिश्चित हो रही है। व्यापारियों का कहना है कि पार्सल स्पेशल ट्रेनों के नियमित संचालन से ऊंझा का मसाला कारोबार देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में और अधिक विस्तार प्राप्त करेगा। इससे स्थानीय व्यापार को नई ऊर्जा मिलेगी और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी। व्यापारिक संगठनों ने भारतीय रेलवे की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य में यदि ऐसी सेवाओं का विस्तार किया जाता है, तो ऊंझा के मसाला उद्योग को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूती मिलेगी। गौरतलब है कि ऊंझा देश-विदेश में जीरा, सौंफ, इसबगोल और अन्य मसालों के प्रमुख व्यापारिक केंद्र के रूप में जाना जाता है। तीसरी पार्सल स्पेशल ट्रेन का सफल संचालन इस बात का संकेत है कि रेलवे और व्यापार जगत के बीच बेहतर समन्वय से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है। इस पहल से ऊंझा का मसाला उद्योग भविष्य में और अधिक ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार दिखाई दे रहा है।