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Election Cyber Fraud: चुनाव में साइबर ठगी से रहें सावधान, फर्जी लिंक-डीपफेक से रहे सावधान 

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राजस्थान   Published by: Shikha Pandey , Date: 25/08/2026 05:17:37 pm Share:
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  • Date:
  • 25/08/2026 05:17:37 pm
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राजस्थान: अलवर निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर तैयारियां तेज होने के साथ ही साइबर ठगी का खतरा भी बढ़ गया है। साइबर ठग चुनाव के दौरान मतदाताओं, प्रत्याशियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को निशाना बना सकते हैं। ठगी के लिए फर्जी लिंक, ओटीपी, क्यूआर कोड, फिशिंग ई-मेल और संदिग्ध मोबाइल एप का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, फर्जी खबरों और डीपफेक वीडियो के जरिए मतदाताओं को गुमराह करने की कोशिश भी हो सकती है। राजस्थान पुलिस ने साइबर अपराध से बचाव को लेकर एडवाइजरी जारी कर लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। अलवर एसपी सुधीर चौधरी ने बताया कि पुलिस मुख्यालय की साइबर क्राइम शाखा ने चुनाव के दौरान होने वाली संभावित साइबर ठगी और फर्जी सूचनाओं को लेकर लोगों को सावधान किया है।

व्हाट्सएप और एसएमएस से भेजे जा सकते हैं फर्जी लिंक

साइबर क्राइम एवं तकनीकी सेवाएं के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस वीके सिंह के अनुसार, साइबर ठग व्हाट्सएप और एसएमएस के जरिए चुनाव से जुड़े फर्जी संदेश भेज सकते हैं। इनमें ‘वोटर लिस्ट में अपना नाम देखें’, ‘आपका मतदान केंद्र बदल गया है’ या ‘अपना वोटर कार्ड अपडेट करें’ जैसे संदेश शामिल हो सकते हैं। संदेश के साथ दिए गए लिंक पर क्लिक करने पर फर्जी वेबसाइट खुल सकती है, जहां निजी और बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा सकती है। कुछ मामलों में मोबाइल में हानिकारक सॉफ्टवेयर भी इंस्टॉल कराया जा सकता है। पुलिस ने लोगों से कहा है कि किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें। चुनाव से संबंधित जानकारी केवल आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत माध्यमों से ही प्राप्त करें।

ओटीपी और बैंकिंग जानकारी साझा न करें

किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, बैंक खाता, डेबिट या क्रेडिट कार्ड की जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। किसी के कहने पर संदिग्ध क्यूआर कोड स्कैन करने या अनजान एप डाउनलोड करने से भी बचें। चुनावी सर्वे, मतदान प्रक्रिया या सरकारी योजना के नाम पर मांगी जाने वाली व्यक्तिगत जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है।

डीपफेक वीडियो से भी रहें सतर्क

चुनाव के दौरान प्रत्याशियों और नेताओं के नाम से फर्जी वीडियो, ऑडियो और सोशल मीडिया पोस्ट वायरल किए जा सकते हैं। डीपफेक तकनीक के जरिए असली जैसे दिखने वाले वीडियो तैयार कर लोगों को भ्रमित किया जा सकता है। पुलिस ने अपील की है कि किसी भी संदिग्ध वीडियो या संदेश को सत्यापित किए बिना आगे साझा न करें। साइबर ठगी होने पर पीड़ित तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।